बिन पानी सब सून
नदियों स्रोतों से आता हुआ जल
हमें अपने चारो ओर अत्यंत जलराशि दिखाई पड़ती है. फिर भी कितनी विचित्र बात है कि यह सारा पानी धरती के हर एक आदमी की ज़रूरत को पूरा करने के लिए नाक़ाफी है.
जल का गहराता संकट
जल में आवश्यकता से अधिक खनिज पदार्थ अनावश्यक लवण, कार्बनिक, अकार्बनिक पदार्थ, मल-मूत्र, कूड़ा-करकट, गंदे नालों का पानी आदि नदियों, झीलों, सागरो में विसर्जित किये जाते रहने से ये पदार्थ जल के वास्तविक रूप को प्रदूषित कर देते हैं. जिसका मनुष्य और अन्य जीवों पर घातक प्रभाव पड़ता है.
डिटर्जेंट व अनावश्यक पदार्थ से दूषित होता जल
लोग नदियों के जल में कपड़े धोते है जिसके कारण नदियों से आना वाला जल हम तक पहुँचने से पहले ही अशुद्ध या दूषित हो जाता है और इसके कारण शुद्ध जल मिलना मुश्किल होता जा रहा है.
जल पीने योग्य नहीं
जल के बिना जिंदगी का तसव्वुर मुमकिन नहीं हैं. कोई इंसान जल के बिना कुछ दिन तक ही जिन्दा रह सकता है. फिर भी लोगों ने जल को इस कदर प्रदूषित कर दिया है कि पानी पीने योग्य ही नहीं बचा है और जो थोड़ा बहुत जल पीने के लिए लोगों तक पहुँचाया जाता है वो भी लोग बर्बाद करते नज़र आते हैं. जिसके कारण जरूरत मंद लोगों को पानी मिलना भी मुश्किल हो जाता है.
जल की अनावश्यक बर्बादी
लोग जल को अपनी जरूरत के हिसाब से उपयोग करने के बजाय व्यर्थ में बहाते नज़र आते है जिसके कारण जल की किल्लत बढ़ती जा रही है.
बेफ़िजूल नलों से बहता जल
कई लापरवाह लोग नलों द्वारा जल का इस्तेमाल करने के बाद नल को बंद करना भी जरूरी नहीं समझते हैं जिसके कारण जल की काफी मात्रा में बर्बादी होती है और इस कारण भी जल की समस्या पैदा होती है.
व्यर्थ में बहता जल
अक्सर लोग जल को आवश्यकता के हिसाब से इस्तेमाल करने के बजाय उसे व्यर्थ में बहाते नज़र आते हैं. कुछ लोग अपने संसाधनो को साफ़ करने के लिए जल को कहीं ज्यादा बर्बाद करते है और पानी की किल्लत को बढ़ावा देते हैं.
जल की बर्बादी ने किया जरूरत मंदों को परेशान
जरूरत मंद लोगों को जल की बढ़ती कमी के कारण और लोगों द्वारा आवश्यकता अनुसार सही से इस्तेमाल नहीं किये जाने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जिसके कारण उन्हें बहुत ही मुश्किलों से जल नसीब हो पाता है.
जल की कमी के कारण खेती पर पड़ता बुरा असर
सिचाईं कार्यों में व्यापत अकुशलता के कारण भूमि /जल उपयोग में सुधार एक महती समस्या है. जल की कमी के कारण अक्सर खेतों में सूखा पड़ने की समस्या हो जाती है. जिससे खेतों की उपज में रुकावट व मुश्किल आती है.
जल संकट का जानवरों पर बुरा प्रभाव
जल की बढ़ती समस्या से जानवरो को भी पीने के लिए पानी मिलना मुश्किल होता जा रहा है. कड़कती धूप में जानवरों को अब पानी भी पीने के लिए मुश्किल हो गया है क्योंकि तालाबों, नदियों और झीलों का पानी या तो सूख गया है या फिर दूषित हो चुका है. इसलिए जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर जल ढूंढ़ते नज़र आते है.











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